श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.23.3 
जयेन वर्धयित्वा च मारीचप्रमुखास्तत:।
पुष्पकं भेजिरे सर्वे सान्त्विता रावणेन तु॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'राजा की जय हो' कहकर और रावण की मंगल कामना करते हुए मारीच सहित सभी राक्षस पुष्पक विमान पर बैठ गए। उस समय रावण ने उन सभी को सांत्वना दी।
 
Saying ‘Victory to the King’ and wishing Ravana well, all the demons including Maricha sat on the Pushpaka Vimana. At that time Ravana consoled them all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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