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श्लोक 7.23.27  |
युद्धार्थी रावण: प्राप्तस्तस्य युद्धं प्रदीयताम्।
वद वा न भयं तेऽस्ति निर्जितोऽस्मीति साञ्जलि:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! राक्षसराज रावण युद्ध के लिए आया है। या तो जाकर उससे युद्ध करो, या हाथ जोड़कर अपनी पराजय स्वीकार कर लो। तब तुम्हें कोई भय नहीं रहेगा।॥27॥ |
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| O King! The demon king Ravana has come for war. Either go and fight with him or accept your defeat with folded hands. Then you will have no fear.'॥ 27॥ |
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