श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 23: रावण के द्वारा निवातकवचों से मैत्री, कालकेयों का वध तथा वरुणपुत्रों की पराजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.23.22 
ददर्श रावणस्तत्र गोवृषेन्द्रवरारणिम्।
यस्माच्चन्द्र: प्रभवति शीतरश्मिर्निशाकर:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
रावण को महादेवजी के वाहन महावृषभ की माता सुरभिदेवी का दर्शन हुआ, जिनसे शीतल किरणों वाला चन्द्रमा प्रकट हुआ (सुरभिषे से क्षीरसमुद्र और क्षीरसमुद्र से चन्द्रमा प्रकट हुआ)। 22॥
 
Ravana had the darshan of Surabhidevi, the mother of Mahavrishabha, the vehicle of Mahadevji, from whom the moon emerged with cool rays (from Surabhishe, Kshirsamudra and from Kshirsamudra, the moon emerged). 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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