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ramayan 7.22.43: यह अनन्त तेजोमय काल दण्ड भी पूर्वकाल में मेरे द्वारा ही बनाया गया था। यह किसी भी प्राणी पर व्यर्थ नहीं जाता। इसके प्रहार से सभी मर जाते हैं॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.22.43 
अमोघो ह्येष सर्वेषां प्राणिनाममितप्रभ:।
कालदण्डो मया सृष्ट: पूर्वं मृत्युपुरस्कृत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यह अनन्त तेजोमय काल दण्ड भी पूर्वकाल में मेरे द्वारा ही बनाया गया था। यह किसी भी प्राणी पर व्यर्थ नहीं जाता। इसके प्रहार से सभी मर जाते हैं॥ 43॥
 
This infinitely bright Kaal Danda (dagger) was also made by me in the past. It is not useless on any living being. Everyone dies on its attack. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)