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ramayan 7.22.17: वीर रघुनन्दन! वे दोनों योद्धा युद्धभूमि से पीछे हटने वाले नहीं थे और दोनों ही विजय चाहते थे; इसलिए उस समय यमराज और राक्षस में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया।   |   ramayan सर्ग 7.22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 22: यमराज और रावण का युद्ध, यम का रावण के वध के लिये उठाये हुए कालदण्ड को ब्रह्माजी के कहने से लौटा लेना, विजयी रावण का यमलोक से प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.22.17 
तदाऽऽसीत् तुमुलं युद्धं यमराक्षसयोर्द्वयो:।
जयमाकांक्षतोर्वीर समरेष्वनिवर्तिनो:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वीर रघुनन्दन! वे दोनों योद्धा युद्धभूमि से पीछे हटने वाले नहीं थे और दोनों ही विजय चाहते थे; इसलिए उस समय यमराज और राक्षस में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया।
 
Brave Raghunandan! Both those warriors were not going to retreat from the battlefield and both wanted victory; therefore a fierce battle began between Yamraj and the demon at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)