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ramayan 7.20.4: हे विश्रवाणपुत्र रावण, हे कुलीन कुल में जन्मे, हे भद्र पुरुष! रुको, मैं तुम्हारे बढ़े हुए बल और पराक्रम से बहुत प्रसन्न हूँ।   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.20.4 
राक्षसाधिपते सौम्य तिष्ठ विश्रवस: सुत।
प्रीतोऽस्म्यभिजनोपेत विक्रमैरूर्जितैस्तव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे विश्रवाणपुत्र रावण, हे कुलीन कुल में जन्मे, हे भद्र पुरुष! रुको, मैं तुम्हारे बढ़े हुए बल और पराक्रम से बहुत प्रसन्न हूँ।
 
Vishravana's son, Ravana, born in a noble family, O gentle one! Wait, I am very pleased with your increased strength and valour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)