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ramayan 7.20.25-26h: 'इसलिए मैं यहाँ से यमपुरी को प्रस्थान कर रहा हूँ। मैं स्वयं सूर्यपुत्र यमराज को, जो संसार के प्राणियों को मृत्यु का दुःख देते हैं, मृत्यु के साथ मिला दूँगा।'॥25 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.20.25-26h 
तदिह प्रस्थितोऽहं वै पितृराजपुरं प्रति॥ २५॥
प्राणिसंक्लेशकर्तारं योजयिष्यामि मृत्युना।
 
 
अनुवाद
'इसलिए मैं यहाँ से यमपुरी को प्रस्थान कर रहा हूँ। मैं स्वयं सूर्यपुत्र यमराज को, जो संसार के प्राणियों को मृत्यु का दुःख देते हैं, मृत्यु के साथ मिला दूँगा।'॥25 1/2॥
 
‘Therefore I am departing from here to Yampuri. I will myself unite Yam, the son of Sun, who gives the suffering of death to the living beings of the world, with death.'॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)