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ramayan 7.20.20-22h: यह सुनकर नारद मुनि बोले, "शत्रुसूदन! यदि तुम रसातल जाना चाहते हो, तो इस समय उसका मार्ग छोड़कर कहाँ जा रहे हो? हे वीर योद्धा! रसातल का यह मार्ग अत्यन्त दुर्गम है और यमराज की नगरी से होकर ही जाता है।"   |   ramayan सर्ग 7.20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 20: नारदजी का रावण को समझाना, उनके कहने से रावण का युद्ध के लिये यमलोक को जाना तथा नारदजी का इस युद्ध के विषयमें विचार करना  »  श्लोक 20-22h
 
 
श्लोक  7.20.20-22h 
अथाब्रवीद् दशग्रीवं नारदो भगवानृषि:॥ २०॥
क्व खल्विदानीं मार्गेण त्वयेहान्येन गम्यते।
अयं खलु सुदुर्गम्य: प्रेतराजपुरं प्रति॥ २१॥
मार्गो गच्छति दुर्धर्ष यमस्यामित्रकर्शन।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर नारद मुनि बोले, "शत्रुसूदन! यदि तुम रसातल जाना चाहते हो, तो इस समय उसका मार्ग छोड़कर कहाँ जा रहे हो? हे वीर योद्धा! रसातल का यह मार्ग अत्यन्त दुर्गम है और यमराज की नगरी से होकर ही जाता है।"
 
Hearing this, the sage Narada said, "Shatrusudan! If you want to go to Rasatal, then where are you going leaving its path at this time? You brave warrior! This path to Rasatal is very difficult and goes only through the city of Yamraj."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)