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ramayan 7.2.5: 'उनके गुण, गुण और चरित्र का पूर्ण वर्णन नहीं किया जा सकता। उनका परिचय केवल इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि वे प्रजापति के पुत्र हैं।॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.2.5 
नानुकीर्त्या गुणास्तस्य धर्मत: शीलतस्तथा।
प्रजापते: पुत्र इति वक्तुं शक्यं हि नामत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'उनके गुण, गुण और चरित्र का पूर्ण वर्णन नहीं किया जा सकता। उनका परिचय केवल इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि वे प्रजापति के पुत्र हैं।॥5॥
 
‘His qualities, virtue and character cannot be fully described. It will be enough to introduce him only by saying that he is the son of Prajapati.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)