श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.2.4 
पुरा कृतयुगे राम प्रजापतिसुत: प्रभु:।
पुलस्त्यो नाम ब्रह्मर्षि: साक्षादिव पितामह:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्रीराम! प्राचीन काल की बात है - सत्ययुग में प्रजापति ब्रह्माजी के एक प्रभावशाली पुत्र हुए, जो ब्रह्मर्षि पुलस्त्य के नाम से प्रसिद्ध हैं। वे ब्रह्माजी के समान तेजस्वी हैं।
 
Sriram! It is a matter of ancient times - Satyayuga, Prajapati Brahmaji had an influential son, who is famous by the name of Brahmarishi Pulastya. He is as bright as Lord Brahma. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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