Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.2.29: महाबली पुलस्त्य मुनि उसके चरित्र और उत्तम आचरण से अत्यन्त प्रसन्न हुए और प्रसन्नतापूर्वक इस प्रकार बोले-॥29॥   |   ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.2.29 
तस्यास्तु शीलवृत्ताभ्यां तुतोष मुनिपुङ्गव:।
प्रीत: स तु महातेजा वाक्यमेतदुवाच ह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाबली पुलस्त्य मुनि उसके चरित्र और उत्तम आचरण से अत्यन्त प्रसन्न हुए और प्रसन्नतापूर्वक इस प्रकार बोले-॥29॥
 
‘The mighty sage Pulastya was very pleased with his character and good conduct and spoke happily as follows:॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)