Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.2.26: "तपस्या में लगे रहने के कारण तुम अवश्य थक जाते होगे; इसलिए वह सदैव तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारी देखभाल करेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।" ॥26॥ | ramayan सर्ग 7.2: महर्षि अगस्त्य के द्वारा पुलस्त्य के गुण और तपस्या का वर्णन तथा उनसे विश्रवा मुनि की उत्पत्ति का कथन । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपश्चरणयुक्तस्य श्रम्यमाणेन्द्रियस्य ते।
शुश्रूषणपरा नित्यं भविष्यति न संशय:॥ २६॥
अनुवाद
"तपस्या में लगे रहने के कारण तुम अवश्य थक जाते होगे; इसलिए वह सदैव तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारी देखभाल करेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।" ॥26॥
"You must be getting tired due to being engaged in tapasya; therefore she will always stay with you and take care of you, there is no doubt about this." ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥