Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.19.29: 'किन्तु हे राक्षस! तूने अपने व्यंग्यात्मक वचनों से इक्ष्वाकु वंश का अपमान किया है, अतः मैं तुझे शाप देता हूँ - तेरे लिए कुछ अशुभ कहूँगा। यदि मैंने दान, पुण्य, यज्ञ और तप किया है, धर्मानुसार प्रजा का पालन किया है, तो मेरी कही हुई बात सत्य होगी।' | ramayan सर्ग 7.19: रावण के द्वारा अनरण्य का वध तथा उनके द्वारा उसे शाप की प्राप्ति । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इक्ष्वाकुपरिभावित्वाद् वचो वक्ष्यामि राक्षस।
यदि दत्तं यदि हुतं यदि मे सुकृतं तप:।
यदि गुप्ता: प्रजा: सम्यक् तदा सत्यं वचोऽस्तु मे॥ २९॥
अनुवाद
'किन्तु हे राक्षस! तूने अपने व्यंग्यात्मक वचनों से इक्ष्वाकु वंश का अपमान किया है, अतः मैं तुझे शाप देता हूँ - तेरे लिए कुछ अशुभ कहूँगा। यदि मैंने दान, पुण्य, यज्ञ और तप किया है, धर्मानुसार प्रजा का पालन किया है, तो मेरी कही हुई बात सत्य होगी।'
‘But, O demon! You have insulted the Ikshwaku clan with your sarcastic words, so I will curse you – I will say something inauspicious for you. If I have done charity, good deeds, sacrifices and penance, if I have looked after the subjects properly according to the Dharma, then my words will come true.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥