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ramayan 7.18.6: शत्रुघ्न श्री राम! इसी प्रकार जब अन्य देवता भी भिन्न-भिन्न रूप धारण करके आए, तब रावण यज्ञवेदी में इस प्रकार घुस आया मानो कोई अपवित्र कुत्ता वहाँ घुस आया हो॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.18.6 
अन्वेष्वपि गतेष्वेवं देवेष्वरिनिषूदन।
रावण: प्राविशद् यज्ञं सारमेय इवाशुचि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न श्री राम! इसी प्रकार जब अन्य देवता भी भिन्न-भिन्न रूप धारण करके आए, तब रावण यज्ञवेदी में इस प्रकार घुस आया मानो कोई अपवित्र कुत्ता वहाँ घुस आया हो॥6॥
 
Shatrughan Shri Ram! Similarly, when the other gods also took different forms, then Ravana entered the sacrificial altar as if an unholy dog ​​had entered there. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)