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ramayan 7.18.36: इस प्रकार उत्तम वरदान देकर, यज्ञ-पर्व पूर्ण होने पर, सभी देवता राजा मरुत के साथ अपने धाम स्वर्ग को चले गये।   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.18.36 
एवं दत्त्वा वरांस्तेभ्यस्तस्मिन् यज्ञोत्सवे सुरा:।
निवृत्ते सह राज्ञा ते पुन: स्वभवनं गता:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उत्तम वरदान देकर, यज्ञ-पर्व पूर्ण होने पर, सभी देवता राजा मरुत के साथ अपने धाम स्वर्ग को चले गये।
 
Having thus bestowed them with excellent boons, all the Gods, after the completion of the sacrificial festival, went back to their abode, the heaven, along with King Marut.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डेऽष्टादश: सर्ग: ॥ १ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें अठारहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)