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ramayan 7.18.30: तत्पश्चात् वरुण ने गंगाजल में विचरण करने वाले हंसों को संबोधित करते हुए कहा - 'पक्षिराज! मेरे प्रेमपूर्ण वचन सुनो-॥30॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.18.30 
वरुणस्त्वब्रवीद्धंसं गङ्गातोयविचारिणम्।
श्रूयतां प्रीतिसंयुक्तं वच: पत्ररथेश्वर॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वरुण ने गंगाजल में विचरण करने वाले हंसों को संबोधित करते हुए कहा - 'पक्षिराज! मेरे प्रेमपूर्ण वचन सुनो-॥30॥
 
After that, Varun addressed the swans roaming in the waters of Ganga and said - 'King of birds! Listen to my loving words—॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)