Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.18.27: जैसे मैं अन्य प्राणियों को नाना प्रकार के रोगों से पीड़ित करता हूँ, वैसे ही मेरी प्रसन्नता के कारण वे रोग तुम्हें पीड़ित नहीं कर सकेंगे; इसमें संशय नहीं है॥27॥ | ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथान्ये विविधै रोगै: पीडॺन्ते प्राणिनो मया।
ते न ते प्रभविष्यन्ति मयि प्रीते न संशय:॥ २७॥
अनुवाद
जैसे मैं अन्य प्राणियों को नाना प्रकार के रोगों से पीड़ित करता हूँ, वैसे ही मेरी प्रसन्नता के कारण वे रोग तुम्हें पीड़ित नहीं कर सकेंगे; इसमें संशय नहीं है॥27॥
Just as I afflict other creatures with various kinds of diseases, those diseases will not be able to affect you due to my pleasure; there is no doubt about this.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥