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ramayan 7.18.26: श्रीराम! तत्पश्चात धर्मराज ने प्राग्वंश की छत पर बैठे हुए कौवे से कहा - 'पक्षी! मैं तुझ पर बहुत प्रसन्न हूँ। प्रसन्न होने पर मैं जो कुछ कहता हूँ, तू मेरे ये वचन सुन।' 26॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.18.26 
धर्मराजोऽब्रवीद् राम प्राग्वंशे वायसं प्रति।
पक्षिंस्तवास्मि सुप्रीत: प्रीतस्य वचनं शृणु॥ २६॥
 
 
अनुवाद
श्रीराम! तत्पश्चात धर्मराज ने प्राग्वंश की छत पर बैठे हुए कौवे से कहा - 'पक्षी! मैं तुझ पर बहुत प्रसन्न हूँ। प्रसन्न होने पर मैं जो कुछ कहता हूँ, तू मेरे ये वचन सुन।' 26॥
 
Sriram! Thereafter Dharmaraj said to the crow sitting on the roof of Pragvansh - 'Bird! I am very happy with you. Whatever I say when I am happy, listen to these words of mine. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)