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ramayan 7.18.10: तीनों लोकों में तुम्हारे अतिरिक्त ऐसा कौन राजा होगा जो मेरे पराक्रम को न जानता हो? मैं वही रावण हूँ, जिसने अपने भाई कुबेर को हराकर इस विमान को छीन लिया है।॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 18: रावण द्वारा मरुत्त की पराजय तथा इन्द्र आदि देवताओं का मयूर आदि पक्षियों को वरदान देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.18.10 
त्रिषु लोकेषु कोऽन्योऽस्ति यो न जानाति मे बलम्।
भ्रातरं येन निर्जित्य विमानमिदमाहृतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में तुम्हारे अतिरिक्त ऐसा कौन राजा होगा जो मेरे पराक्रम को न जानता हो? मैं वही रावण हूँ, जिसने अपने भाई कुबेर को हराकर इस विमान को छीन लिया है।॥10॥
 
Who else in the three worlds, apart from you, would be the king who does not know my power? I am that Ravana who has taken away this plane after defeating his brother Kubera.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)