vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 17: रावण से तिरस्कृत ब्रह्मर्षि कन्या वेदवती का उसे शाप देकर अग्नि में प्रवेश करना और दूसरे जन्म में सीता के रूप में प्रादुर्भूत होना
»
श्लोक 34-35h
श्लोक
7.17.34-35h
एवमुक्त्वा प्रविष्टा सा ज्वलितं जातवेदसम्॥ ३४॥
पपात च दिवो दिव्या पुष्पवृष्टि: समन्तत:।
अनुवाद
ऐसा कहकर वह प्रज्वलित अग्नि में प्रविष्ट हो गई। उस समय उसके चारों ओर आकाश से दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी।
Saying this, she entered the blazing fire. At that time, divine flowers started raining from the sky all around her. 34 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×