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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण
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श्लोक 8
श्लोक
7.15.8
क्रुद्धेन च तदा राजन् मारीचेन युयुत्सुना।
निमेषान्तरमात्रेण द्वे सहस्रे निपातिते॥ ८॥
अनुवाद
राजन! उस समय क्रोधित और युद्ध के लिए आतुर मारीच ने पलक झपकते ही शेष दो हजार यक्षों का नाश कर दिया।
King! At that time Maricha, enraged and eager for battle, destroyed the remaining two thousand Yakshas in the blink of an eye.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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