श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.15.27 
एवं निरयगामी त्वं यस्य ते मतिरीदृशी।
न त्वां समभिभाषिष्येऽसद‍्वृत्तेष्वेव निर्णय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार तुम्हें भी अपने पापकर्मों के कारण नरक में जाना पड़ेगा; क्योंकि तुम्हारा मन पापों में इतना लीन हो रहा है। दुष्टों से बात नहीं करनी चाहिए, ऐसा शास्त्रों का निर्णय है; अतः मैं भी अब तुमसे बात नहीं करूँगा।॥27॥
 
‘Similarly, you will also have to go to hell because of your bad deeds; because your mind is getting so engrossed in sins. One should not talk to wicked people, this is the decision of the scriptures; hence I will also not talk to you anymore.'॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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