श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.15.26 
ऋद्धिं रूपं बलं पुत्रान् वित्तं शूरत्वमेव च।
प्राप्नुवन्ति नरा लोके निर्जितं पुण्यकर्मभि:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
संसार के मनुष्य पुण्यकर्मों से ही ऐश्वर्य, सुन्दर रूप, बल, तेज, पराक्रम और पुत्र आदि प्राप्त करते हैं ॥26॥
 
‘The men of the world attain prosperity, beautiful appearance, strength, glory, bravery and sons etc. only by performing virtuous deeds. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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