श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.15.24 
पापस्य हि फलं दु:खं तद् भोक्तव्यमिहात्मना।
तस्मादात्मापघातार्थं मूढ: पापं करिष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
पाप का फल दुःख ही है और उसे यहीं भोगना पड़ता है; अतः जो मूर्ख पाप करता है, वह मानो अपने को ही मार डालता है॥ 24॥
 
The result of sin is only misery, and one has to suffer it here; therefore a fool who commits sin is as if he is killing himself.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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