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श्लोक 24
श्लोक
7.15.24
पापस्य हि फलं दु:खं तद् भोक्तव्यमिहात्मना।
तस्मादात्मापघातार्थं मूढ: पापं करिष्यति॥ २४॥
अनुवाद
पाप का फल दुःख ही है और उसे यहीं भोगना पड़ता है; अतः जो मूर्ख पाप करता है, वह मानो अपने को ही मार डालता है॥ 24॥
The result of sin is only misery, and one has to suffer it here; therefore a fool who commits sin is as if he is killing himself.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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