श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.15.20 
दैवतानि न नन्दन्ति धर्मयुक्तेन केनचित्।
येन त्वमीदृशं भावं नीतस्तच्च न बुद्धॺसे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
देवता तुम्हारे किसी भी कार्य से प्रसन्न नहीं होते, चाहे वह तुम्हारे मतानुसार धर्ममय ही क्यों न हो; इसीलिए तुमने ऐसी क्रूर प्रवृत्ति धारण कर ली है, परन्तु तुम इस बात को नहीं समझते॥ 20॥
 
The gods are not pleased with any of your actions, even if they are righteous according to your beliefs; that is why you have acquired such cruel attitude, but you do not understand this.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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