श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.15.19 
यो हि मोहाद् विषं पीत्वा नावगच्छति दुर्मति:।
स तस्य परिणामान्ते जानीते कर्मण: फलम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो मिथ्या बुद्धि वाला मनुष्य आसक्ति के कारण विष पीकर भी उसे विष नहीं पहचानता, वह अपने कर्म का फल भोगने के बाद ही जान पाता है।॥19॥
 
A person of wrong intellect who, despite drinking poison due to attachment, does not recognize it as poison, comes to know the result of his action only after facing its consequences.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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