श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 15: माणिभद्र तथा कुबेर की पराजय और रावण द्वारा पुष्पक विमान का अपहरण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.15.18 
यन्मया वार्यमाणस्त्वं नावगच्छसि दुर्मते:।
पश्चादस्य फलं प्राप्य ज्ञास्यसे निरयं गत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे दुष्टबुद्धि दशग्रीव! मेरे इतना कहने पर भी तू यह बात नहीं समझ रहा है; परन्तु आगे चलकर जब तू अपने कुकर्मों का फल भोगकर नरक में गिरेगा, तब मेरी बात तुझे समझ में आएगी॥18॥
 
You evil-minded Daśagrīva! You are not understanding this even after I have warned you, but later on when you will face the consequences of your misdeeds and fall into hell, then you will understand my words.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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