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श्लोक 7.15.10  |
धूम्राक्षेण समागम्य माणिभद्रो महारणे।
मुसलेनोरसि क्रोधात् ताडितो न च कम्पित:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| उस महायुद्ध में धूम्राक्ष ने आकर क्रोधित होकर मणिभद्र की छाती पर मूसल से प्रहार किया, किन्तु इससे वह विचलित नहीं हुआ। |
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| In that great battle Dhumraksha came and angrily struck Manibhadra on his chest with a pestle, but this did not deter him. |
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