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ramayan 7.14.4-5: जब यक्षों ने सुना कि दुष्टात्मा राक्षसराज रावण युद्ध के लिए उत्साहित होकर अपने मंत्रियों के साथ कैलाश पर्वत पर डेरा डाले हुए है, तो वे उस राक्षस के सामने टिक न सके। यह जानकर कि वह राजा का भाई है, यक्ष उस स्थान पर गए जहाँ धन के स्वामी कुबेर उपस्थित थे।   |   ramayan सर्ग 7.14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  7.14.4-5 
संनिविष्टं गिरौ तस्मिन् राक्षसेन्द्रं निशम्य तु।
युद्धेप्सुं तं कृतोत्साहं दुरात्मानं समन्त्रिणम्॥ ४॥
यक्षा न शेकु: संस्थातुं प्रमुखे तस्य रक्षस:।
राज्ञो भ्रातेति विज्ञाय गता यत्र धनेश्वर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब यक्षों ने सुना कि दुष्टात्मा राक्षसराज रावण युद्ध के लिए उत्साहित होकर अपने मंत्रियों के साथ कैलाश पर्वत पर डेरा डाले हुए है, तो वे उस राक्षस के सामने टिक न सके। यह जानकर कि वह राजा का भाई है, यक्ष उस स्थान पर गए जहाँ धन के स्वामी कुबेर उपस्थित थे।
 
When the Yakshas heard that the evil-minded demon king Ravana, excited for war, has camped with his ministers on Mount Kailash, they could not stand before that demon. Knowing that he is the brother of the king, the Yakshas went to the place where Kubera, the lord of wealth, was present.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)