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ramayan 7.14.29: फिर उसने वही खंभा उठाया और उससे यक्ष पर प्रहार किया। यक्ष का शरीर टुकड़े-टुकड़े हो गया। उसका मुख फिर कभी दिखाई नहीं दिया। 29.   |   ramayan सर्ग 7.14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.14.29 
तेनैव तोरणेनाथ यक्षस्तेनाभिताडित:।
नादृश्यत तदा यक्षो भस्मीकृततनुस्तदा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने वही खंभा उठाया और उससे यक्ष पर प्रहार किया। यक्ष का शरीर टुकड़े-टुकड़े हो गया। उसका मुख फिर कभी दिखाई नहीं दिया। 29.
 
Then he picked up the same pillar and attacked the Yaksha with it. The Yaksha's body was crushed into pieces. His face was not seen again. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)