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ramayan 7.14.19: लड़ते-लड़ते, भागते और एक के बाद एक मरकर स्वर्ग को जाने वाले यक्षों की संख्या तथा आकाश में खड़े होकर युद्ध देखने वाले ऋषियों के समूह की संख्या इतनी बढ़ गई थी कि आकाश में उन सबके लिए स्थान नहीं था॥19॥   |   ramayan सर्ग 7.14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.14.19 
हतानां गच्छतां स्वर्गं युध्यतामथ धावताम्।
प्रेक्षतामृषिसङ्घानां न बभूवान्तरं दिवि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
लड़ते-लड़ते, भागते और एक के बाद एक मरकर स्वर्ग को जाने वाले यक्षों की संख्या तथा आकाश में खड़े होकर युद्ध देखने वाले ऋषियों के समूह की संख्या इतनी बढ़ गई थी कि आकाश में उन सबके लिए स्थान नहीं था॥19॥
 
The number of the Yakshas fighting and running and going to heaven after dying one after the other, and the group of Rishis standing in the sky and watching the war had increased so much that there was no place for all of them in the sky.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)