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ramayan 7.14.18: कुछ लोग थककर एक-दूसरे से लिपट गए, उनके हथियार गिर पड़े और वे युद्धभूमि में ऐसे गिर पड़े जैसे पानी के वेग से नदी के किनारे टूट जाते हैं।   |   ramayan सर्ग 7.14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 14: मन्त्रियों सहित रावण का यक्षों पर आक्रमण और उनकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.14.18 
श्रान्ताश्चान्योन्यमालिङ्गॺ भ्रष्टशस्त्रा रणाजिरे।
सीदन्ति च तदा यक्षा: कूला इव जलेन ह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग थककर एक-दूसरे से लिपट गए, उनके हथियार गिर पड़े और वे युद्धभूमि में ऐसे गिर पड़े जैसे पानी के वेग से नदी के किनारे टूट जाते हैं।
 
Some were exhausted and embraced each other. Their weapons fell down and they collapsed in the battlefield in the same way as the banks of a river break due to the force of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)