श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.13.9 
उद्यानानि विचित्राणि नन्दनादीनि यानि च।
तानि गत्वा सुसंक्रुद्धो भिनत्ति स्म दशानन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दशानन क्रोध में भरकर नंदनवन आदि देवताओं के अद्भुत उद्यानों में जाकर उन सबको नष्ट कर देता था॥9॥
 
In a fit of rage, Dashanan used to go to the wonderful gardens of the gods like Nandanavana etc. and destroy them all.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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