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ramayan 7.13.5: इसमें नीलम की सीढ़ियाँ थीं। चारों ओर घंटियों के आकार की झालरें थीं। इसका मुख्य द्वार हाथीदांत का बना था और हीरे-जवाहरात से बनी वेदी और चबूतरा उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।   |   ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.13.5 
वैदूर्यकृतसोपानं किङ्किणीजालकं तथा।
दान्ततोरणविन्यस्तं वज्रस्फटिकवेदिकम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इसमें नीलम की सीढ़ियाँ थीं। चारों ओर घंटियों के आकार की झालरें थीं। इसका मुख्य द्वार हाथीदांत का बना था और हीरे-जवाहरात से बनी वेदी और चबूतरा उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
 
It had stairs made of sapphire. There were bell-shaped fringes all around. Its main gate was made of ivory and the altar and platform made of diamonds and crystals were adorning it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)