Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.13.32-33h: 'इसलिए अब तुम अपने कुल को कलंकित करने वाले पापकर्मों की संगति से दूर रहो; क्योंकि देवतागण ऋषियों के साथ मिलकर तुम्हें मारने का उपाय सोच रहे हैं।' | ramayan सर्ग 7.13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदधर्मिष्ठसंयोगान्निवर्त कुलदूषणात्॥ ३२॥
चिन्त्यते हि वधोपाय: सर्षिसङ्घै: सुरैस्तव।
अनुवाद
'इसलिए अब तुम अपने कुल को कलंकित करने वाले पापकर्मों की संगति से दूर रहो; क्योंकि देवतागण ऋषियों के साथ मिलकर तुम्हें मारने का उपाय सोच रहे हैं।'
‘Therefore, now you should stay away from the company of sinful acts which will bring disgrace to your family; because the gods along with the sages are thinking of a way to kill you.’
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥