श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.13.26 
समाप्ते नियमे तस्मिंस्तत्र देवो महेश्वर:।
तत: प्रीतेन मनसा प्राह वाक्यमिदं प्रभु:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘उस अनुष्ठान के पूर्ण होने पर भगवान् महेश्वरदेव मेरे सामने प्रकट हुए और प्रसन्न मन से बोले-॥26॥
 
‘After the completion of that ritual, Lord Maheshwardev appeared before me and said with a happy heart -॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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