श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.13.2 
ततो भ्रातरमासीनं कुम्भकर्णोऽब्रवीद् वच:।
निद्रा मां बाधते राजन् कारयस्व ममालयम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब कुंभकर्ण ने पास बैठे अपने भाई रावण से कहा - 'हे राजन! मुझे नींद आ रही है, इसलिए मेरे लिए एक घर बनवा दीजिए, जहाँ मैं सो सकूँ।'
 
Then Kumbhakarna said to his brother Ravana who was sitting nearby - 'O King! I am feeling sleepy; so get a house made for me where I can sleep.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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