श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.13.19 
दृष्टं मे नन्दनं भग्नमृषयो निहता: श्रुता:।
देवतानां समुद्योगस्त्वत्तो राजन् मया श्रुत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'तुमने नंदनवन को नष्ट कर दिया - यह मैंने अपनी आँखों से देखा है। मैंने यह भी सुना है कि तुमने अनेक ऋषियों का वध किया है। हे राजन! (इसी कारण देवता तुमसे बदला लेना चाहते हैं) मैंने सुना है कि देवताओं ने तुम्हारे विरुद्ध षडयंत्र रचा है।
 
‘You destroyed Nandanvana – I have seen this with my own eyes. I have also heard that you have killed many sages. O King! (The gods want to take revenge from you because of this) I have heard that the gods have started a conspiracy against you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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