श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 13: रावण द्वारा बनवाये गये शयनागार में कुम्भकर्ण का सोना, रावण का अत्याचार, कुबेर का दूत भेजकर उसे समझाना तथा कुपित हुए रावण का उस दूत को मार डालना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.13.17 
राजन् वदामि ते सर्वं भ्राता तव यदब्रवीत्।
उभयो: सदृशं वीर वृत्तस्य च कुलस्य च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वीर महाराज! आपके भाई कोषाध्यक्ष कुबेर ने जो सन्देश आपके पास भेजा है, वह माता-पिता दोनों के वंश और सदाचार के अनुरूप है। मैं उसे विस्तारपूर्वक आपसे कह रहा हूँ। कृपया उसे सुनिए॥17॥
 
Valiant Maharaj! The message which your brother, the treasurer Kubera has sent to you is in accordance with the lineage and good conduct of both the parents. I am telling you about it in full detail. Please listen to it.॥17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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