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ramayan 7.111.6: जो मनुष्य प्रतिदिन पाप करता है, वह भी यदि इस श्लोक का एक भी श्लोक प्रतिदिन पढ़े, तो वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.111.6 
पापान्यपि च य: कुर्यादहन्यहनि मानव:।
पठत्येकमपि श्लोकं पापात् स परिमुच्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन पाप करता है, वह भी यदि इस श्लोक का एक भी श्लोक प्रतिदिन पढ़े, तो वह अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥6॥
 
Even a person who commits sins every day, if he recites even one verse of this verse daily, becomes free from all his sins. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)