श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.111.2 
तत: प्रतिष्ठितो विष्णु: स्वर्गलोके यथा पुरा।
येन व्याप्तमिदं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान् श्री रामजी पहले की भाँति अपने विष्णु रूप में परमधाम में स्थित हो गए। समस्त चराचर और अचर प्राणियों सहित यह सम्पूर्ण त्रिलोकी उनसे व्याप्त है॥ 2॥
 
In this way, Lord Shri Ram, as before, established himself in the Supreme Abode in his Vishnu form. This entire Triloki, including all living and non-living creatures, is pervaded by him.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd