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ramayan 7.111.16-17h: जो मनुष्य प्राचीन काल में वाल्मीकि द्वारा रचित इस आश्ररामायण आदिकाव्य को सदैव भक्तिपूर्वक सुनता है, वह भगवान विष्णु के समान गति को प्राप्त होता है ॥16 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 111: रामायण- काव्य का उपसंहार और इसकी महिमा  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  7.111.16-17h 
आदिकाव्यमिदं त्वार्षं पुरा वाल्मीकिना कृतम्॥ १६॥
य: शृणोति सदा भ‍क्त्या स गच्छेद् वैष्णवीं तनुम्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्राचीन काल में वाल्मीकि द्वारा रचित इस आश्ररामायण आदिकाव्य को सदैव भक्तिपूर्वक सुनता है, वह भगवान विष्णु के समान गति को प्राप्त होता है ॥16 1/2॥
 
One who always listens with devotion to this Aarshramayan Adikavya composed by Valmiki in ancient times, attains the likeness of Lord Vishnu. 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)