श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.110.8 
तत: पितामहो वाणीं त्वन्तरिक्षादभाषत।
आगच्छ विष्णो भद्रं ते दिष्टॺा प्राप्तोऽसि राघव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माजी आकाश से ही बोले- 'हे श्रीविष्णु के अवतार रघुनन्दन! आइए, आपका कल्याण हो। यह हमारा परम सौभाग्य है कि आप अपने परमधाम में आ रहे हैं॥ 8॥
 
Then Brahmaji spoke from the sky itself- 'O Raghunandan, the incarnation of Shri Vishnu! Come, may you be blessed. It is our great fortune that you are coming to your supreme abode.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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