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ramayan 7.110.6: अत्यंत पवित्र, सुगन्धित और सुखदायक वायु बहने लगी। देवताओं द्वारा दिव्य पुष्पों की भारी वर्षा होने लगी।   |   ramayan सर्ग 7.110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.110.6 
पुण्या वाता ववुश्चैव गन्धवन्त: सुखप्रदा:।
पपात पुष्पवृष्टिश्च देवैर्मुक्ता महौघवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अत्यंत पवित्र, सुगन्धित और सुखदायक वायु बहने लगी। देवताओं द्वारा दिव्य पुष्पों की भारी वर्षा होने लगी।
 
A very pure, fragrant and soothing wind began to blow. A heavy rain of divine flowers showered by the gods began.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)