श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.110.17 
इमे हि सर्वे स्नेहान्मामनुयाता यशस्विन:।
भक्ता हि भजितव्याश्च त्यक्तात्मानश्च मत्कृते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ये सभी लोग प्रेमवश मेरे पीछे आए हैं। ये सभी प्रसिद्ध और मेरे भक्त हैं। इन्होंने मेरे लिए अपने सांसारिक सुखों का त्याग किया है, अतः ये मेरी कृपा के पूर्णतः पात्र हैं।॥17॥
 
‘All these people have followed me out of love. All of them are famous and my devotees. They have given up their worldly pleasures for me, hence they are completely deserving of my grace.’॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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