श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.110.12 
पितामहवच: श्रुत्वा विनिश्चित्य महामति:।
विवेश वैष्णवं तेज: सशरीर: सहानुज:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा के ये वचन सुनकर अत्यंत बुद्धिमान श्री रघुनाथजी ने निश्चय किया और अपने भाइयों सहित सशरीर वैष्णव वैभव में प्रवेश किया।
 
After listening to these words of Lord Brahma, the extremely intelligent Sri Raghunath made some decision and along with his brothers, entered into his Vaishnava glory with his body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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