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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 110: भाइयों सहित श्रीराम का विष्णुस्वरूप में प्रवेश तथा साथ आये हुए सब लोगों को संतानक- लोक की प्राप्ति
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श्लोक 1
श्लोक
7.110.1
अध्यर्धयोजनं गत्वा नदीं पश्चान्मुखाश्रिताम्।
सरयूं पुण्यसलिलां ददर्श रघुनन्दन:॥ १॥
अनुवाद
अयोध्या से डेढ़ योजन दूर जाकर रघुकुलनन्दन भगवान श्री राम ने पश्चिम की ओर मुख करके पास ही पुण्यमयी सरयू को देखा॥1॥
After going one and a half yojana away from Ayodhya, Raghukulnandan Lord Shri Ram, facing west, saw the virtuous Saryu found nearby. 1॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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