श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.11.47 
प्रहस्तोऽथ दशग्रीवं गत्वा वचनमब्रवीत्।
प्रहृष्टात्मा महात्मानं सहामात्यं सहानुजम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रहस्त प्रसन्न होकर महामना दशग्रीव के पास गए, जो अपने मंत्रियों और भाइयों के साथ बैठे थे और बोले-
 
Thereafter Prahast became happy and went to Mahamana Dashagriva who was sitting with his ministers and brothers and said-
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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