श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.11.37 
ब्रह्मर्षिस्त्वेवमुक्तोऽसौ विश्रवा मुनिपुङ्गव:।
प्राञ्जलिं धनदं प्राह शृणु पुत्र वचो मम॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उसके ऐसा कहने पर ऋषि विश्रवा हाथ जोड़कर खड़े हो गए और धनद कुबेर से बोले, 'बेटा! मेरी बात सुनो।
 
On his saying this, the sage Vishrava stood up with folded hands and said to Dhanada Kubera, 'Son! Listen to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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