श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  7.11.35-36 
अभिवाद्य गुरुं प्राह रावणस्य यदीप्सितम्।
एष तात दशग्रीवो दूतं प्रेषितवान् मम॥ ३५॥
दीयतां नगरी लङ्का पूर्वं रक्षोगणोषिता।
मयात्र यदनुष्ठेयं तन्ममाचक्ष्व सुव्रत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अपने पिता को प्रणाम करके उसने रावण की इच्छा बताई - 'बेटा! आज दशग्रीव ने मेरे पास दूत भेजकर कहा है कि इस लंका नगरी में पहले राक्षस रहते थे, अतः इसे राक्षसों को लौटा दो। सुव्रत! अब कृपा करके मुझे बताओ कि इस विषय में मुझे क्या करना चाहिए।'
 
There, after paying his respects to his father, he told him about Ravana's wish - 'Son! Today, Dashagriva has sent a messenger to me and said that earlier demons used to live in this city of Lanka, so return it to the demons. Suvrata! Now, please tell me what I should do in this matter.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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